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Wednesday, June 15, 2022

जंगल में आग

वो एक अफवाह उड़ाते हैं
जंगल में आग लगाते हैं

नादानों की फेहरिस्त बनाके
पत्थर हाथों में थमाते हैं

खून में गर्मी है जिनके
जलसे में उन्हें बुलाते हैं

तेरा मजहब सबसे बड़ा
ये कहकर उकसाते हैं

मजबूरों की मजबूरी का
कुछ वो फायदा उठाते हैं

हुक्मरान हैं जो *विंकल*
अल्लाह राम को लड़वाते हैं

गौरव कुमार *विंकल*

Monday, June 13, 2022

साज़िश से जीतेगा



हां, कोई भी झूठा नहीं है

बस एक तू सच्चा नहीं है


सब जानता है दिल तेरा

अब तू कोई बच्चा नहीं है


साज़िश से जीतेगा, छी

ये बिल्कुल अच्छा नहीं है


हेर फेर तू जितना भी कर

हिसाब उसका कच्चा नहीं है


पागल लोग कहेंगे *विंकल*

चाहे पागल तू लगता नहीं है


गौरव कुमार *विंकल*


Saturday, June 11, 2022

खुद से वादा कर



जीवन अपना सादा कर
जरूरतों को आधा कर

जुबान पर लगाम रख
यूं पार ना मर्यादा कर

सब बुरे विचार त्याग दे
नेक अपना ईरादा कर

गलतियों को मान जा
बहस ना तू ज्यादा कर

मन किसी का मत दुखाना 
विंकल खुद से वादा कर

गौरव कुमार *विंकल*