Saturday, June 11, 2022

खुद से वादा कर



जीवन अपना सादा कर
जरूरतों को आधा कर

जुबान पर लगाम रख
यूं पार ना मर्यादा कर

सब बुरे विचार त्याग दे
नेक अपना ईरादा कर

गलतियों को मान जा
बहस ना तू ज्यादा कर

मन किसी का मत दुखाना 
विंकल खुद से वादा कर

गौरव कुमार *विंकल*

Tuesday, June 7, 2022

एक पंक्ति में


रात, एक पंक्ति में
बात, एक पंक्ति में

पल मे छूटा बरसों का
साथ, एक पंक्ति में

हमने मुक्कमल कर दी
मुलाकात, एक पंक्ति में

अब तुम्हें क्या बताएं
हयात, एक पंक्ति में

ज़ाहिर ना होंगे विंकल
जज़्बात, एक पंक्ति में

गौरव कुमार *विंकल*

जिद्द


बरसों पहले ही 

हम

एक दूजे के

घर के मेहमान 

बन जाते

अगर

*माँ*

जिद्द ना करती !


गौरव कुमार *विंकल*







Saturday, June 4, 2022

अपनापन


अगर तन से अच्छा मन होता
फिर खुद का ना दुश्मन होता

नाम तेरा जो कभी भज लेता
फिर खाली न यह बर्तन होता

देख आना जाना कौन भोगता
गर चौरासी का ना बंधन होता

मोह माया में ना फंसता जो
सब कुछ तुझको अर्पण होता

खतायें बख्श देता विंकल की
गर जरा भी अपनापन होता

गौरव कुमार *विंकल*

Thursday, June 2, 2022

मन ...



मन प्रश्नों तक ही सीमित है

उसका ऐसा होना नियमित है


क्षण भर वो उल्लास मनाता

क्षण भर में वो चिंतित है


तन पर वश मन का ही

मूर्छित सा कभी जीवित है


धावक वो ब्रह्मांड में ऐसा

जो वेदों में भी अंकित है


वक्त बेवक्त कहता लिखने को

वो विंकल को करता भ्रमित है 


गौरव कुमार *विंकल*