Tuesday, June 7, 2022

एक पंक्ति में


रात, एक पंक्ति में
बात, एक पंक्ति में

पल मे छूटा बरसों का
साथ, एक पंक्ति में

हमने मुक्कमल कर दी
मुलाकात, एक पंक्ति में

अब तुम्हें क्या बताएं
हयात, एक पंक्ति में

ज़ाहिर ना होंगे विंकल
जज़्बात, एक पंक्ति में

गौरव कुमार *विंकल*

11 comments:

  1. पढ़ लिए सब जज़्बात
    एक पंक्ति में ।
    बहुत खूब

    ReplyDelete
  2. बहुत सुन्दर और भावपूर्ण,बस एक पंक्ति में!!!!

    ReplyDelete
  3. बहुत भावनात्मक

    ReplyDelete
  4. आप सभी का बहुत बहुत आभार

    ReplyDelete
  5. भावपूर्ण अभिव्यक्ति। बहुत सुंदर

    ReplyDelete
  6. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 13 जून 2022 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  7. आपकी लिखी रचना  ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द" मंगलवार 14 जून 2022 को साझा की गयी है....
    पाँच लिंकों का आनन्द पर
    आप भी आइएगा....धन्यवाद!

    ReplyDelete
  8. वाह.... ज़ाहिर न होंगे जज़्बात एक पंक्ति में-–-अप्रतिम

    ReplyDelete